Monday, 15 January 2018

कोई शहर अजनबी नही होता......



किसी ने कहा था वो शहर अजनबी है लोग भी अजनबी होंगे...पहली बार आया इस अजनबी शहर मे ...इस याद शहर मे...शहर भी नया था...लोग भी नए थे...मंजिल भी नया था...रास्ता भी नया था...कुछ डरा सा भी था...कुछ सहमा सा भी था...कुछ दिन बीता...कुछ रांते बीती...कुछ सपने देखे...कुछ अपने देखे...उन्ही अपनो से हिम्मत भी मिली... उन्हीं अपनो से खुशी भी मिली...मुझे नही मालूम था कि ये याद शहर भी कुछ ऐसे दोस्तो से भी मिला देगी जिनकी मिशाल शब्दों से नही किया जा सकता...बस उनका साथ हमेशा बना रहे...हर अजनबी शहर मे अपने भी होते हैं...जहां दोस्त अच्छे होते हैं   वो शहर अजनबी नही होता...और अपने तो बस अपने होते हैं....

आशीष गुप्ता

2 comments:

तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष