आज कल मुझे ख़्याल...बड़े अच्छे आते हैं...
सोता हूं तो... ख़्वाब बड़े अच्छे आते हैं...
नहीं यकीं तुम्हें तो...आज़मा कर देख लेना...
कोई मुझसे सवाल तो करें... जवाब बड़े अच्छे आते हैं...
आशीष गुप्ता....
हां मुझे पसंद है...
तुम्हारा मासूम सा चेहरा, जिसे देखकर मेरे दिन की शुरुआत होती है...
हां मुझे पसंद है...
तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान, जिसे देखकर मेरे दिल को सुकून मिलता है...
हां मुझे पसंद है...
तुम्हारी झील सी आँखें, जिसमें बस डूब जाने का मन करता है...
हां मुझे पसंद है...
तुम्हारे माथे की बिंदिया... जो तुम्हारे सादगी को और खूबसूरत बनाती है...
हां मुझे पसंद है...
तुम्हारी आंखों का काजल, जो निगाहों से तीर छोड़ती हो..
हां मुझे पसंद है....
तुम्हारा रूठना, तुम्हारा मानना...
तुमसे बेवजह बात करना...
तुम्हें परेशान करना...और
तुम्हारा इंतजार करना...
हां मुझे पसंद है...तुम और सिर्फ तुम...
आशीष....
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...