Monday, 18 May 2020

खामोशियां

ज़रूरी नहीं कि हर बात का इजहार अल्फ़ाज़ से ही किया जाए...

कभी-कभी खामोशियां भी बयां कर जाती है अपने जज़्बात को...

आशीष गुप्ता...

Saturday, 9 May 2020

मां


इस दुनिया में जिसने मुझे...अपने पैरों पे खड़े होना सिखाया है...
उंगलियां पकड़कर जिसने मुझे... चलना सिखाया है...
जिंदगी की हर कठिनायों से मुझे डट कर... लड़ना सिखाया है...
वो मेरी मां ही हैं जिसने मुझे... जिंदगी को जीना सिखाया है...
उनके इस एहसान इस ममता को मै... ज़िन्दगी भर ना चुका पाऊंगा...
लूंगा सात जन्म लेकिन फिर भी... ना उतार पाऊंगा...

आशीष गुप्ता

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...