सोचते सोचते आज सुबह से शाम हो गई...
ख़्वाबों में तुमसे आज थोड़ी सी मुलाक़ात हो गई
मेरे जिश्म में तेरे जिश्म कि ख़ुशबू घुली कुछ इस कदर...
हम भीगते रहे और मोहब्बत की बरसात हो गई...
आशीष गुप्ता...
तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष
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