तुम अदालत हो तो हम भी गुनहगार हैं... तुम जज हो तो हम ही सज़ा के हकदार हैं...
आशीष गुप्ता...
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
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