Wednesday, 29 July 2026

बारिश की बूंदों में...
कुछ पुराने एहसास मिल जाते हैं....
ख़ामोश शामों में...
कई अधूरे जवाब मिल जाते हैं...
ज़िंदगी की भागदौड़ में...
थोड़ा ठहर जाना भी ज़रूरी है...
क्योंकि सुकून अक्सर वहीं मिलता है...
जहाँ दो किनारे मिल जाते हैं...

आशीष.....

मोहब्बत दिल तक पहुँची...
इश्क़ रूह में उतर गया....
कुछ लोग वादा करके बदल गए...
कुछ बिना वादे के ही दिल में उतर गया...

आशीष


मैंने लिखना...
इसलिए नहीं सीखा कि मशहूर हो जाऊँ...
मैंने लिखना...
इसलिए चुना ताकि ख़ुद से दूर न हो जाऊँ...
मेरे अल्फ़ाज़...
किसी महफ़िल के मोहताज नहीं...
ये मेरे अकेलेपन के सबसे अच्छे हमसफ़र हैं....

आशीष

Thursday, 23 July 2026


काश ऐसा भी एक दिन हो...
जब ज़िंदगी में कोई उलझन न हो...
बस हल्की-सी बारिश हो...
ठंडी हवाओं का सुकून हो...
सामने एक खूबसूरत सी परी हो...
जिसकी मुकुराहट पे हमारी नज़र हो...
वो कुछ कहे... मैं कुछ सुनूँ...
मैं कुछ कहूं...वो कुछ सुने...
मोहब्बत भी हो...चाहत भी हो....
आँखों की आँखों से गुफ्तगू भी हो....
ना कल की फ़िक्र हो... ना आज की थकान हो..
ना रिश्तों का हिसाब हो... ना सपनों पर सवाल हो...


बस ज़िंदगी उसी पल में सिमट जाए....
जिस पल वो बाहों में आ जाए...

आशीष.....

Wednesday, 22 July 2026


मुलाक़ातें इत्तेफ़ाक़ से नहीं...
किस्मत के ख़ूबसूरत बहाने से होती हैं...

आशीष....

Monday, 20 July 2026

कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ....

इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज....

सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं चलता...

दिल तो हर पल तुम्हें याद करता है...

बस वक़्त का पता ही नहीं चलता...

अगर मेरी ख़ामोशी से तुम नाराज़ हो गए हो...

तो यक़ीन मानो...

हम भी अंदर ही अंदर बिखर गए हैं...

चलो आज सारी शिकायतें हवा में उड़ा देते हैं...

जो दूरियाँ आ गई हैं...उन्हें मुस्कुराकर मिटा देते हैं...

ज़िंदगी की इस भागदौड़ में...बस इतना-सा साथ चाहिए...

तुम फिर से "कैसे हो?" कह दो...मुझे और क्या चाहिए...

आशीष


पंद्रह बरस बीत गए... मौसम भी कई बदल गए...
पर आपके चेहरे का नूर आज भी वही है....
कुछ लोग वक़्त के साथ बदल जाते हैं...
और कुछ वक़्त को बदलने पर मजबूर कर देते हैं...

तुम्हें देखकर हमेशा यही महसूस होता है कि
पंद्रह साल पहले जितनी खूबसूरत थीं, आज भी उतनी ही हो...
तुम्हारी खूबसूरती सिर्फ़ चेहरे में नहीं...
तुम्हारे सलीके...तुम्हारी मुस्कान और तुम्हारी सादगी में भी है...

शायद इसी वजह से वक़्त भी तुम्हारे सामने हार मान गया....
और अपनी रफ़्तार का असर तुम पर छोड़ नहीं पाया...
सच कहूँ...
तुम्हें देखकर कभी यह एहसास ही नहीं होता
कि इतने साल बीत चुके हैं...
कुछ चेहरे उम्र के साथ बदल जाते हैं...
लेकिन कुछ चेहरे याद बनकर नहीं... मिसाल बनकर रह जाते हैं...

तुम उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हो...
जिनकी खूबसूरती किसी समय की मोहताज नहीं होती....

कहते हैं...वक़्त हर चीज़ बदल देता है...
चेहरे...आदतें...एहसास… सब कुछ...

लेकिन तुम्हें देखकर यह बात अधूरी-सी लगती है...

पंद्रह साल पहले जैसी मुस्कान थी...
वैसी ही आज भी है...
वही सादगी...वही अपनापन...
और वही ख़ूबसूरती...जो पहली नज़र में नहीं...
धीरे-धीरे दिल में उतरती है...

शायद असली ख़ूबसूरती वही होती है...
जिस पर वक़्त का कोई असर नहीं पड़ता...

आज भी तुम्हें देखकर यही लगता है कि
कुछ चीज़ें उम्र से नहीं...
अपने किरदार से ख़ूबसूरत होती हैं...

और तुम...
उन ख़ूबसूरत लोगों में से हो...
जिन्हें देखकर हमेशा एक ही बात दिल में आती है...

कुछ लोग सच में साल नहीं गिनते....
बस हर गुज़रते साल के साथ और भी ख़ास होते जाते हैं....

ये तारीफ़ सिर्फ़ तुम्हारी खूबसूरती की नहीं...
उस ख़ूबसूरत शख़्सियत की भी है...जो इतने सालों बाद भी वैसी ही है...
कुछ लोग उम्र के साथ बड़े होते हैं...
और कुछ लोग वक़्त के साथ और भी ख़ूबसूरत हो जाते हैं… शायद तुम उन्हीं में से एक हो....

आशीष...

बारिश की बूंदों में... कुछ पुराने एहसास मिल जाते हैं.... ख़ामोश शामों में... कई अधूरे जवाब मिल जाते हैं... ज़िंदगी की भागदौड़ में... थोड़ा ठ...