Monday, 3 November 2025

जिसको अपना बनाने में हमने पूरी जिंदगी लगा दी...

उसने सामने से हमें पहचानने से मना कर दिया...

बात ये भी नहीं कि वो हमें आज भूल गए...

बात ये हैं कि हमारे ही महफ़िल में हमें आने से मना कर दिया...

आशीष...

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....