तुम जो मिले तो ज़िन्दगी कितनी हसींन हो गयी थी...
वो ख़ुशी के पल कुछ पल के लिए मेरे करीब सी हो गयी थी...
कॉलेज में बात हुई थी कॉलेज से रिश्ते की शुरुआत हुई थी...
दोस्ती भी हो गयी थी दिल के थोड़ा करीब सी हो गयी थी...
मिले थे पहली बार तो घबरा सा गया था...
सामने देखकर कुछ सरमा सा गया था...
छुप छुप कर देखना अच्छा लगा मुझे...
वो कॉलेज में मिलना अच्छा लगा मुझे...
तुम जाकर भी वापस कुछ बहाने से आई...
मुझे देखने के लिए शायद तू फिर वापस आई...
वो दिन भी मेरे लिए कितना खास बन गया...
जैसे कोई सपना तब साकार हो गया...
मुलाक़ातो का सिलसिला शायद युँ हीं बरक़रार रहता...
तुम्हारा दिल भी मुझसे मिलने को बेक़रार रहता...
फिर वो दिन भी आया जब दोबारा मुलाक़ात होनी थी...
तेरे भाई की शादी आई और फिर मुलाक़ात होनी थी...
आया वहाँ घूमा वहाँ...
छुप छुप कर भी तुमको देखा वहां...
सामने भी आती थी थोड़ा मुस्कुराती थी...
कितना कोशिश कर लू फिर भी बात ही ना वो पाती थी...
चलो ये दौर भी बड़ा शानदार रहा...
तुमसे मिलने का वो पल बड़ा यादगार रहा...
अब वो दिन भी आया जब मिलना फिर से हुआ...
बाइक पर बैठकर मेरे घर को आना फिर से हुआ...
बाइक पर बैठाना एक ख्वाब था मेरे लिए...
वो ख़्वाब आख़िर सच कर ही दिया तुमने मेरे लिए...
फिर दूर जाना तुमसे बड़ा बुरा सा लगा...
मेरा मन भी मेरे दिल से अब उदास रहने लगा....
तेरे साथ बिताया हुआ वो पल मेरे ज़िन्दगी का सबसे हसीन पल रहा...
मेरे ज़िन्दगी के उस बीतें हुए दिन में सबसे हसीन कल रहा...
तू आज भी मेरे सांसों में मेरे धड़कन में सबसे करीब बसते हो...
तुम दूर होकर भी आज मेरे सबसे करीब रहते हो....😍😍😍
आशीष गुप्ता

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