Saturday, 28 April 2018

बारिश...


बादल का गरजना, बिजली का चमकना, हवाओं का बहकना,
इंतजार कराती हैँ किसी के आने की... उम्मीद जगाती है किसी को कुछ पाने की...ये बारिस की बूंदे हीं तो हैं... जो बादलों से टकराकर, तूफानों को हराकर, सूखी पड़ी नदी की, और बंज़र हुई जमीं की प्यास बुझाती है...ये बारिश ही तो है, जिनसे फूलों की कलियां, चिड़ियों का चहकना, पानी में झरना और आँखों में रैना का एहसास कराती है...

आशीष गुप्ता

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