सफर थोड़ा लम्बा है...
मगर कुछ ख्वाहिशें अभी बाकी है...
अभी तो समंदर सी लहरें उठी हैं मेरे अंदर...
अब तो शहर हर शहर में खुद को थोड़ा मशहूर करना बाकी है...
जब कदम बढ़ा ही दिया है मैंने मंजिल की तरफ...
तो अब ये नहीं सोचना कि जाना कितना दूर है...
अब तो बस एक ही जिद है मेरी...
इस खुले आसमान में ज़िन्दगी जीने की उड़ान अभी बाकी है....
#आशीष #गुप्ता....

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