Tuesday, 29 January 2019

तुम

बहुत दिनों से सोच रहा था कि आज कुछ लिख दूं...
गर इजाज़त हो तुम्हारी तो एक ग़ज़ल ही लिख दूं...

तुम कहो तो दिन को रात भी लिख दूं
अपने दिल के सारे जज़्बात भी लिख दूं...

प्यार भी लिख दूं मोहब्बत भी लिख दूं...
चेहरे पे तेरी हर मुस्कुराहट को लिख दूं...

तू आए तो कदमों की आहट भी लिख दूं...
तू कह दे तो सांसों में सांसे भी लिख दूं...

तू नज़रे झुकाए तो शर्माना भी लिख दूं...
तू पलकें उठाए तो आशिकाना भी लिख दूं...

सागर से जो बहता वो रवानी भी लिख दूं...
आंखों से जो निकले वो पानी भी लिख दूं...

हवाएं भी लिख दूं बरसात भी लिख दूं...
तू कह दे तो धड़कन पे तेरा नाम ही लिख दूं...

आशीष गुप्ता...

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष