Tuesday, 29 January 2019

घर

नई-नई सुबह गर हो तो, दिन भी अच्छा लगता है...
नया-नया शहर गर हो तो, शहर भी अच्छा लगता है...
ढूंढ लो कितना भी सुख, इस सारे संसार में...
लेकिन थोड़ी सी तकलीफ गर हो तो, अपना घर ही अच्छा लगता है...

आशीष गुप्ता...

No comments:

Post a Comment

तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष