आज मौसम का अंदाज कुछ बदलते देखा है...
कहीं बारिश तो कहीं गीली जमीं को सूखते देखा है...
कहीं बारिश तो कहीं गीली जमीं को सूखते देखा है...
इसी बारिश में कुछ पक्के मकां को भी बनते देखा है...
इसी बारिश में कुछ कच्चे मकां को भी गिरते देखा है...
इसी बारिश में कुछ कच्चे मकां को भी गिरते देखा है...
इसी बारिश में भी खुद को तेरे साथ भीगते देखा है...
इसी बारिश में भी तुझे खुद से दूर जाते देखा है...
इसी बारिश में भी तुझे खुद से दूर जाते देखा है...
आज बारिश की बूंदों को चोट खाते हुए देखा है...
आज हमने भी उस बादल को रोते हुए देखा है...
आज हमने भी उस बादल को रोते हुए देखा है...
आशीष गुप्ता..

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