Monday, 12 August 2019

बरसात




आज मौसम का अंदाज कुछ बदलते देखा है...
कहीं बारिश तो कहीं गीली जमीं को सूखते देखा है...

इसी बारिश में कुछ पक्के मकां को भी बनते देखा है...
इसी बारिश में कुछ कच्चे मकां को भी गिरते देखा है...

इसी बारिश में भी खुद को तेरे साथ भीगते देखा है...
इसी बारिश में भी तुझे खुद से दूर जाते देखा है...

आज बारिश की बूंदों को चोट खाते हुए देखा है...
आज हमने भी उस बादल को रोते हुए देखा है...

आशीष गुप्ता..

No comments:

Post a Comment

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...