तुम्हें मैंने कई बार देखा...
लेकिन जब भी देखा तो लगा की पहली बार देखा...
वो नज़रों का धोखा था या आँखों की बदमाशियां...
उस बादल ने भी तुम्हें, बारिश में भीगते पहली बार देखा...
तुम गुज़र गए बगल से हवा के झोंकें की तरह, यूँ हवाओं से इशारा भी मैंने पहली बार देखा...
तुम करीब आ गए मेरे इतना की, रूह भी कपकपा सी गई...
यूं बारिश में पसीना भी, मैंने पहली बार देखा...
लिपटकर तुझसे जब, मेरे होंठों ने तेरे होंठों को छुआ...
तेरे जिश्म से अपनी ख़ुशबू, कसम से पहली बार देखा...
तुम्हारी नशीली आँखों के प्यालों ने, मुझे यूँ झकझोर दिया...
इन आंखों में इतना नशा होगा, ये मैंने पहली बार देखा...
आशीष गुप्ता...
लेकिन जब भी देखा तो लगा की पहली बार देखा...
वो नज़रों का धोखा था या आँखों की बदमाशियां...
उस बादल ने भी तुम्हें, बारिश में भीगते पहली बार देखा...
तुम गुज़र गए बगल से हवा के झोंकें की तरह, यूँ हवाओं से इशारा भी मैंने पहली बार देखा...
तुम करीब आ गए मेरे इतना की, रूह भी कपकपा सी गई...
यूं बारिश में पसीना भी, मैंने पहली बार देखा...
लिपटकर तुझसे जब, मेरे होंठों ने तेरे होंठों को छुआ...
तेरे जिश्म से अपनी ख़ुशबू, कसम से पहली बार देखा...
तुम्हारी नशीली आँखों के प्यालों ने, मुझे यूँ झकझोर दिया...
इन आंखों में इतना नशा होगा, ये मैंने पहली बार देखा...
आशीष गुप्ता...
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