आज कल हवाओं का रुख भी कुछ बेवफ़ा सा है...
आदमी की तन्हाई देखकर...मौसम अपना मिजाज़ बदलता है...
आशीष गुप्ता
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तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
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बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं लेकिन आज लिख रहा हूं... मोहब्बत की पहली बरसात लिख रहा हूं... बागों में जो महके वो खुश्बू लिख रहा हूं... और उस खु...
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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष
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हम बुरे थे, बुरे हैं, बुरे ही रहेंगे, मेरा मिज़ाज ही ऐसा है, ऐसे ही रहेंगे...आशीष😎😡
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