कभी आज़मा के देख लेना....
कभी हमारी आंखों में झांक के देख लेना...
हर नशा फ़ीका ही निकलेगा हमारी मोहब्बत के आगे...
यक़ीन ना आए तो हमसे एक बार मोहब्बत कर के देख लेना...
आशीष गुप्ता...
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
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