Friday, 31 July 2026


रात थोड़ी ठंडी हो...
आसमान में चाँद अपनी...पूरी रोशनी बिखेर रहा हो...
सड़कें ख़ामोश हों....हवा तुम्हारे बालों से खेल रही हो...
और हम बिना किसी मंज़िल के..
बस साथ चलते रहें...
न कोई जल्दी हो....न किसी बात की फ़िक्र....
बस तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में हो..
कुछ बातें हों....कुछ ख़ामोशियाँ हों...
और हर ख़ामोशी में भी सिर्फ़ तुम्हारा एहसास हो....
उस रात अगर वक़्त ठहर जाए...
तो शायद ज़िंदगी से फिर कभी कोई शिकायत न रहे...
काश कुछ रातें ऐसी भी हों...
जो सुबह होने की जल्दी न करें…
जहाँ वक़्त नहीं...सिर्फ़ एहसास चलें...
और हर पल यही लगे कि यही ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा है....

आशीष.....

Wednesday, 29 July 2026

बारिश की बूंदों में...
कुछ पुराने एहसास मिल जाते हैं....
ख़ामोश शामों में...
कई अधूरे जवाब मिल जाते हैं...
ज़िंदगी की भागदौड़ में...
थोड़ा ठहर जाना भी ज़रूरी है...
क्योंकि सुकून अक्सर वहीं मिलता है...
जहाँ दो किनारे मिल जाते हैं...

आशीष.....

मोहब्बत दिल तक पहुँची...
इश्क़ रूह में उतर गया....
कुछ लोग वादा करके बदल गए...
कुछ बिना वादे के ही दिल में उतर गया...

आशीष


मैंने लिखना...
इसलिए नहीं सीखा कि मशहूर हो जाऊँ...
मैंने लिखना...
इसलिए चुना ताकि ख़ुद से दूर न हो जाऊँ...
मेरे अल्फ़ाज़...
किसी महफ़िल के मोहताज नहीं...
ये मेरे अकेलेपन के सबसे अच्छे हमसफ़र हैं....

आशीष

Thursday, 23 July 2026


काश ऐसा भी एक दिन हो...
जब ज़िंदगी में कोई उलझन न हो...
बस हल्की-सी बारिश हो...
ठंडी हवाओं का सुकून हो...
सामने एक खूबसूरत सी परी हो...
जिसकी मुकुराहट पे हमारी नज़र हो...
वो कुछ कहे... मैं कुछ सुनूँ...
मैं कुछ कहूं...वो कुछ सुने...
मोहब्बत भी हो...चाहत भी हो....
आँखों की आँखों से गुफ्तगू भी हो....
ना कल की फ़िक्र हो... ना आज की थकान हो..
ना रिश्तों का हिसाब हो... ना सपनों पर सवाल हो...


बस ज़िंदगी उसी पल में सिमट जाए....
जिस पल वो बाहों में आ जाए...

आशीष.....

Wednesday, 22 July 2026


मुलाक़ातें इत्तेफ़ाक़ से नहीं...
किस्मत के ख़ूबसूरत बहाने से होती हैं...

आशीष....

Monday, 20 July 2026

कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ....

इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज....

सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं चलता...

दिल तो हर पल तुम्हें याद करता है...

बस वक़्त का पता ही नहीं चलता...

अगर मेरी ख़ामोशी से तुम नाराज़ हो गए हो...

तो यक़ीन मानो...

हम भी अंदर ही अंदर बिखर गए हैं...

चलो आज सारी शिकायतें हवा में उड़ा देते हैं...

जो दूरियाँ आ गई हैं...उन्हें मुस्कुराकर मिटा देते हैं...

ज़िंदगी की इस भागदौड़ में...बस इतना-सा साथ चाहिए...

तुम फिर से "कैसे हो?" कह दो...मुझे और क्या चाहिए...

आशीष


पंद्रह बरस बीत गए... मौसम भी कई बदल गए...
पर आपके चेहरे का नूर आज भी वही है....
कुछ लोग वक़्त के साथ बदल जाते हैं...
और कुछ वक़्त को बदलने पर मजबूर कर देते हैं...

तुम्हें देखकर हमेशा यही महसूस होता है कि
पंद्रह साल पहले जितनी खूबसूरत थीं, आज भी उतनी ही हो...
तुम्हारी खूबसूरती सिर्फ़ चेहरे में नहीं...
तुम्हारे सलीके...तुम्हारी मुस्कान और तुम्हारी सादगी में भी है...

शायद इसी वजह से वक़्त भी तुम्हारे सामने हार मान गया....
और अपनी रफ़्तार का असर तुम पर छोड़ नहीं पाया...
सच कहूँ...
तुम्हें देखकर कभी यह एहसास ही नहीं होता
कि इतने साल बीत चुके हैं...
कुछ चेहरे उम्र के साथ बदल जाते हैं...
लेकिन कुछ चेहरे याद बनकर नहीं... मिसाल बनकर रह जाते हैं...

तुम उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हो...
जिनकी खूबसूरती किसी समय की मोहताज नहीं होती....

कहते हैं...वक़्त हर चीज़ बदल देता है...
चेहरे...आदतें...एहसास… सब कुछ...

लेकिन तुम्हें देखकर यह बात अधूरी-सी लगती है...

पंद्रह साल पहले जैसी मुस्कान थी...
वैसी ही आज भी है...
वही सादगी...वही अपनापन...
और वही ख़ूबसूरती...जो पहली नज़र में नहीं...
धीरे-धीरे दिल में उतरती है...

शायद असली ख़ूबसूरती वही होती है...
जिस पर वक़्त का कोई असर नहीं पड़ता...

आज भी तुम्हें देखकर यही लगता है कि
कुछ चीज़ें उम्र से नहीं...
अपने किरदार से ख़ूबसूरत होती हैं...

और तुम...
उन ख़ूबसूरत लोगों में से हो...
जिन्हें देखकर हमेशा एक ही बात दिल में आती है...

कुछ लोग सच में साल नहीं गिनते....
बस हर गुज़रते साल के साथ और भी ख़ास होते जाते हैं....

ये तारीफ़ सिर्फ़ तुम्हारी खूबसूरती की नहीं...
उस ख़ूबसूरत शख़्सियत की भी है...जो इतने सालों बाद भी वैसी ही है...
कुछ लोग उम्र के साथ बड़े होते हैं...
और कुछ लोग वक़्त के साथ और भी ख़ूबसूरत हो जाते हैं… शायद तुम उन्हीं में से एक हो....

आशीष...

पिछले कई सालों बाद जब तुझे देखा...तो वक़्त जैसे ठहर-सा गया...
कुछ चेहरे बदल जाते हैं....मगर तू पहले से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत हो गई....
तेरी आँखों में आज भी वही सादगी है....
और तेरी मुस्कान में आज भी वही जादू....
सालों की दूरी ने बस फ़ासले बढ़ाए थे....
तेरी ख़ूबसूरती ने तो यादों को और भी हसीन बना दिया....
इतने साल की दूरी थी... मगर तुझे देखकर लगा जैसे वक़्त कभी गुज़रा ही नहीं...
बस एक फ़र्क़ है...पहले तू ख़ूबसूरत थी...आज तेरी ख़ूबसूरती में और भी निखार आ गया है....
लोग वक़्त के साथ बदल जाते हैं...
और कुछ लोग वक़्त के साथ और भी ख़ास हो जाते हैं… तू उन्हीं में से एक है....

आशीष

कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ....

इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज....

सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं चलता...

दिल तो हर पल तुम्हें याद करता है...

बस वक़्त का पता ही नहीं चलता...

अगर मेरी ख़ामोशी से तुम नाराज़ हो गए हो...

तो यक़ीन मानो...

हम भी अंदर ही अंदर बिखर गए हैं...

चलो आज सारी शिकायतें हवा में उड़ा देते हैं...

जो दूरियाँ आ गई हैं...उन्हें मुस्कुराकर मिटा देते हैं...

ज़िंदगी की इस भागदौड़ में...बस इतना-सा साथ चाहिए...

तुम फिर से "कैसे हो?" कह दो...मुझे और क्या चाहिए...

आशीष


कभी-कभी सोचता हूँ कि हमारी मुलाक़ात...
यूँ ही नहीं हुई होगी...
शायद किस्मत को हमारी बातें पसंद थीं...
तुमसे बात करके हमेशा ऐसा लगा...
जैसे भीड़ में भी कोई अपना मिल गया हो...
तुम्हारी आदत है या असर, पता नहीं...
मगर तुम्हारा ज़िक्र आते ही चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती है...
ज़िंदगी हर रोज़ नई उलझनें लेकर आती है...
लेकिन कुछ यादें ऐसी होती हैं...
जो हर थकान के बाद भी सुकून दे जाती हैं...
तुम भी उन्हीं यादों में शामिल हो...
अगर कभी मेरी ख़ामोशी ने तुम्हें दूर होने का एहसास कराया हो...
तो बस इतना समझ लेना...
कुछ जज़्बात शब्दों से नहीं...सिर्फ़ एहसासों से समझे जाते हैं....
बस इतना कहना था...
कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते...वो बस दिल में बस जाते हैं...
और तुम, मेरे लिए वैसा ही एक रिश्ता हो...
आशीष....😎

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...