Friday, 31 July 2026
Wednesday, 29 July 2026
Thursday, 23 July 2026
Wednesday, 22 July 2026
Monday, 20 July 2026
कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ....
इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज....
सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं चलता...
दिल तो हर पल तुम्हें याद करता है...
बस वक़्त का पता ही नहीं चलता...
अगर मेरी ख़ामोशी से तुम नाराज़ हो गए हो...
तो यक़ीन मानो...
हम भी अंदर ही अंदर बिखर गए हैं...
चलो आज सारी शिकायतें हवा में उड़ा देते हैं...
जो दूरियाँ आ गई हैं...उन्हें मुस्कुराकर मिटा देते हैं...
ज़िंदगी की इस भागदौड़ में...बस इतना-सा साथ चाहिए...
तुम फिर से "कैसे हो?" कह दो...मुझे और क्या चाहिए...
आशीष
कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ....
इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज....
सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं चलता...
दिल तो हर पल तुम्हें याद करता है...
बस वक़्त का पता ही नहीं चलता...
अगर मेरी ख़ामोशी से तुम नाराज़ हो गए हो...
तो यक़ीन मानो...
हम भी अंदर ही अंदर बिखर गए हैं...
चलो आज सारी शिकायतें हवा में उड़ा देते हैं...
जो दूरियाँ आ गई हैं...उन्हें मुस्कुराकर मिटा देते हैं...
ज़िंदगी की इस भागदौड़ में...बस इतना-सा साथ चाहिए...
तुम फिर से "कैसे हो?" कह दो...मुझे और क्या चाहिए...
आशीष
आज रास्तों से नहीं...खुद से मिलने निकलूँगा... भीड़ में नहीं....अपने भीतर की ख़ामोशी में टहलूँगा... एक कप चाय... खुला आसमान...और दिल में उमड़...
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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष
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हम बुरे थे, बुरे हैं, बुरे ही रहेंगे, मेरा मिज़ाज ही ऐसा है, ऐसे ही रहेंगे...आशीष😎😡
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लिखने को तो पूरी किताब ही लिख दूं क्या करूं कलम तुम्हारे नाम पे ही रुक जाती है.... आशीष गुप्ता...