Sunday, 16 February 2020

अजनबी

इतने दिनों से जिसकी रह तकि...
वो सर झुकां के बगल से यूं गुजर गए...

मैंने झट से ही जैसे ही उनका नाम लिया...
पलटकर मुस्कुराया और चले गए...

आशीष गुप्ता....

No comments:

Post a Comment

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...