मुसीबतें कितनी ही बड़ी क्यों ना हो... एक विश्वास ही काफी है ज़िन्दगी में उम्मीद जगाने के लिए...
अंधेरा कितना ही ज्यादा क्यों ना हो... एक दीपक ही काफी है अंधकार मिटाने के लिए...
आशीष......
मैने जिसे देखा हर वक़्त... जिसे हमने महसूस किया बेवक्त... आज कल वो मेरे ख्यालों में आने लगी.... कहीं ये इश्क़ तो नहीं... Ashish....
No comments:
Post a Comment