ज़रूरी नहीं कि हर बात का इजहार अल्फ़ाज़ से ही किया जाए...
कभी-कभी खामोशियां भी बयां कर जाती है अपने जज़्बात को...
आशीष गुप्ता...
तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष