Monday, 18 May 2020

खामोशियां

ज़रूरी नहीं कि हर बात का इजहार अल्फ़ाज़ से ही किया जाए...

कभी-कभी खामोशियां भी बयां कर जाती है अपने जज़्बात को...

आशीष गुप्ता...

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष