Friday, 17 July 2020

तुम दूर चले गए...

जो कभी पास हुआ करते थे आज उनको दूर जाते हुए देखा है...
जैसे लहरों को समंदर को छोड़कर कहीं और जाते हुए देखा है...
जहां ज़िन्दगी के सफ़र में साथ देने का वादा किया था वहां खुद को मैंने अकेला ही पाया है...
आज हमने भी अनगिनत तारों के बीच उस चांद को रोते हुए देखा है...

आशीष गुप्ता

No comments:

Post a Comment

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...