Wednesday, 29 July 2020

तुम...

तुम कहते हो की हम अच्छा लिखतें हैं...
अब ये कौन तुम्हें बताएं की हम तुम्हें ही लिखते हैं....


आशीष गुप्ता...

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ये ज़माना बदल गया, अपना शहर बदल गया... जिसको जिसको अपना समझा, वो हर इंसान बदल गया... मैं जनता हूं तुम नहीं बदले, ये बदलाव तो दुनिया का दस्तू...