आज चांद तरे भी कुछ कुछ...बातें कर रहें हैं...
दूर आसमान से रोज़ तेरा...दीदार कर रहें हैं...
तू कब आएगी छत पर वो आज...टकटकी लगाएं बैठें हैं...
तेरी एक झलक पाने के लिए कब से तेरा...इंतजार कर रहें हैं...
आशीष गुप्ता....
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
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