हम बेपरवाह हैं... खुद की परवाह नहीं करते...
हम तो शरीफ़ हैं...बेवजह किसी को परेशान नहीं करते...
कभी भी आज़मा लेना मेरी शराफ़त को तुम...भरी बाज़ार में...
हम ख़ुद ही लुट जातें हैं लेकिन...किसी को बदनाम नहीं करतें...
आशीष गुप्ता...
तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष
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