सुनो ना आज तुमसे कुछ बात करनी है...
इश्क़ तुमसे बेशुमार है.. वहीं इज़हार करनी है...
गर इजाजत हो तो...अपने दिल के दरवाजे खोल देना....
मेरी मोहब्बत को तुम्हारी मोहब्बत से... थोड़ी मुलाकात जो करनी है...
बैठेंगे साथ तेरे... और कुछ बातें करेंगे...
मोहब्बत करेंगे तुझसे... और नज़रों से प्यार करेंगे...
उस बीच कुछ सवाल भी होगा... कुछ जवाब भी होगा...
हमारी एक एक मोहब्बत का... हिसाब भी होगा...
जो छोड़े थे ज़ख्म मेरे सीने पे... वो आज भी बेहिसाब है...
दिल में बहुत दर्द है...और आंखों में शैलाब है...
बयां करूंगा अपनी दास्तां तो... छटपटा जाओगी...
सीने में इतना आग हैं कि... सुनकर ही पिघल जाओगी...
ख़ैर छोड़ो वो एक दौर था... जो आज भूल गया हूं...
तुम्हारे मोहब्बत के चक्कर में... मैं ख़ुद को भूल गया हूं...
बेवफ़ा ही बनना था तो... थोड़ा वफ़ा तो करती...
ज़हर ही देना था तो... थोड़ा इशारा तो करती...
मैं ख़ुशी ख़ुशी मौत को... गले से लगा जाता...
जान क़दमों पे रख देता ...और तेरे इश्क़ में फना हो जाता....
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