कुछ पता नही बस यूं हीं...दरबदर भटकता रहता हूं...
जिस दिन से देखा था उसे... बस उसे ही खोजता रहता हूं...
क्या करूं कमबख्त... ये इश्क़ का आलम ही कुछ ऐसा है...
आज कल उसी के ख्यालों में ही... खोया रहता हूं...
आशीष......
मैने जिसे देखा हर वक़्त... जिसे हमने महसूस किया बेवक्त... आज कल वो मेरे ख्यालों में आने लगी.... कहीं ये इश्क़ तो नहीं... Ashish....
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