Tuesday, 4 February 2025

आज सुबह उठते ही तुम्हारा ख़्याल आया...
जुबां खुलते ही लबों पे तुम्हारा नाम आया...
सोया था जिसे याद कर नींद की आग़ोश में...
आज आया भी उसी का ख़्वाब बेहिसाब आया...

आशीष...

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तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....