आज सुबह उठते ही तुम्हारा ख़्याल आया...
जुबां खुलते ही लबों पे तुम्हारा नाम आया...
सोया था जिसे याद कर नींद की आग़ोश में...
आज आया भी उसी का ख़्वाब बेहिसाब आया...
आशीष...
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
No comments:
Post a Comment