Friday, 31 October 2025

सबका दुखदर्द बांटते बांटते ख़ुद का ख्याल रखना भूल गए...

महफ़िल सजी थी हमारे लिए और हमें ही बुलाना भूल गए....

आशीष

तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष