सबका दुखदर्द बांटते बांटते ख़ुद का ख्याल रखना भूल गए...
महफ़िल सजी थी हमारे लिए और हमें ही बुलाना भूल गए....
आशीष
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
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