मेरे पास कोई शब्द नहीं था...
की तुम्हारी खूबसूरती पे कुछ तारीफ़ करूं...
जब से तुम्हें देखा...
मैंने पूरी किताब ही लिख दी....
आशीष...
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
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