तेरी तस्वीर देखता हूँ तो, कुछ यूँ बयां करने का मन करता है...
तुम्हें देखते ही खुद को, भूल जाने का मन करता है...
वहीँ आँखे हैं जिसे देखकर, डूब जाने का मन करता है...
वही चेहरा है जिसे देखकर, खो जाने का मन करता है....
वही होंठ है जिसे चूमकर, एहसास करने का मन करता है...
वही तुम हो जिसे देखकर, गले लगाने का मन करता है...
तुम्हें देखते ही दिल में आवाज़ सी आती है...
तुम्हें सोंचते ही मन में एक तस्वीर सी बन जाती है...
कोई तो बात है तेरी हर तस्वीर में...
कोई तो राज है तेरी हर तस्वीर में...
तुम दूर होकर भी मेरे पास आ जाती हो...
तस्वीर भेजकर मुझको-मुझसे ही चुरा जाती हो...
ये अंदाज भी तुम्हारा अच्छा लगा मुझे...
तेरा यूं बेक़रार रहना अच्छा लगा मुझे...
जब भी मै अकेला होता हुँ तो तू मेरे पास होती है...
तू ना सही तेरी तस्वीर मेरे साथ होती है....
आशीष गुप्ता

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