Saturday, 28 April 2018

वो चेहरा...

वो चेहरा......जिसे देखता हुँ
छुप छुप कर देखता हुँ......

खोजता हुँ.....हर पल ही खोजता हुँ......
वो आज दिखी......कहीं दूर से दिखी......

थोड़ी पास आ गयी......बहुत ही पास आ गयी......
उसने भी देखा कुछ युं......मैंने भी देखा कुछ युं......

थोड़ी सी मुस्कुरायी......मुझे देखकर मुस्कुरायी......
आज कुछ अलग सा था......चेहरे पे उसके चमक सा था......

ख़ूबसूरत थी......बहुत ही ख़ूबसूरत थी......
मासूमियत भी थी......बहुत ही मासूमियत थी......

वो सबसे अलग थी......हर चेहरे से अलग थी......
वो जैसे परी सी थी......वो इतनी प्यारी जो थी......

(आशीष गुप्ता)

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष