Saturday, 28 April 2018

तुम और में...

तुम ही मेरा प्यार हो, तुम ही मेरा इश्क़ हो...
तुम ही मेरी जान हो, तुम ही मेरा अरमान हो...

तुम ही मेरा झूट हो, तुम ही मेरा सच हो...
तुम ही मेरा ख्वाब हो, तुम ही मेरा आफ़ताब हो...

तुम ही मेरी धूप हो, तुम ही मेरी छाँव हो...
तुम ही मेरी सोच हो, तुम ही मेरे जज़्बात हो..

तुम ही मेरी ताक़त हो, तुम ही मेरी कमज़ोरी हो...
तुम ही मेरी दुआ हो, तुम ही मेरा खुदा हो...

तुम ही मेरा दिन हो, तुम ही मेरी रात हो...
तुम ही मेरा कल हो, तुम ही मेरा आज हो...

तुम ही मेरी ज़िन्दगी हो, तुम ही मेरी बंदिगि हो...
तुम ही मेरी आशिक़ी हो, तुम ही मेरी सादगी हो...

तुम हो तो मेरी साँसे हैं, तुम हो तो मेरी धड़कने हैं...
तुम हो तो हर पर्वत के शीश हैं, तुम हो तभी ये आशीष है...

आशीष गुप्ता

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष