थोड़ा सा प्यार क्या हो गया
चांद को हमने अपना महबूब ही मान लिया...
उसके मोहब्बत को भी हमने खुद का ही ताज मान लिया...
अरे कुछ तो सोचा होता क्या बीतेगी उसपर उस चांदनी रात में...
अपनी मोहब्बत के लिए उस चांद को भी हमने इस ज़मी पर ही उतार दिया...
आशीष...
चांद को हमने अपना महबूब ही मान लिया...
उसके मोहब्बत को भी हमने खुद का ही ताज मान लिया...
अरे कुछ तो सोचा होता क्या बीतेगी उसपर उस चांदनी रात में...
अपनी मोहब्बत के लिए उस चांद को भी हमने इस ज़मी पर ही उतार दिया...
आशीष...
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