जिंदगी की खाली किताब में अभी कुछ शब्द भरने बाकी है.…
जो सपने अभी देखें है वो हक्विकत करना अभी बाकी है....
आशीष गुप्ता...
जो सपने अभी देखें है वो हक्विकत करना अभी बाकी है....
आशीष गुप्ता...
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
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