अंजान सी लड़की, एक प्यारी सी लड़की...
मासूम सी, भोली सी, नटखट सी लड़की...
जिसके नाम में ही शायराना अंदाज है...
जिसके चेहरे पे रहती हमेशा मुस्कान है...
देखा था पहली बार तो नज़रे कुछ पल के लिए रुक सी गई थी..
आंखों के सामने बहुत सी तस्वीर थी, ना जाने कियुं नज़रे तुम पर टिक सी गई थी...
ऐटिट्यूड भी थोड़ा-थोड़ा सा लगता था...
लेकिन ये अंदाज भी तुम्हारा अपना-अपना सा लगता था...
फिर तुमसे थोड़ी बात भी हुई...
कुछ देर के लिए ही सही ख्वाबों में मुलाकात भी हुई...
वो बातों का सिलसिला भी कुछ अच्छा सा लगा...
तुम्हारे हसने का अंदाज भी कुछ अपना सा लगा...
कुछ भी बात करूं तो बुरा नहीं मानती...
थोड़ा हसीं मज़ाक करूं तो भी बुरा नहीं मानती...
दिल में कुछ अरमान था, जो शायद कभी कह नहीं पाया...
वो कुछ एहसास था, जो कभी बयां कर नहीं पाया...
चलो आज कह ही देता हुं वो बात, जो कुछ दिन से दबा रखा हुं...
तू लड़की बड़ी अच्छी लगी, तुझे दिल में छिपा रखा हूं...
मन किया कि काश कभी कुछ इज़हार कर पाता...
सच्चा प्यार का पता नहीं, लेकिन उस प्यार का इकरार कभी कर पाता...
या कह पता वो बात जो तुम्हे देखकर महसूस दिल को होता है...
तुम्हें एक बार गले लगाऊ प्यार से, ये एहसास दिल को होता है...
काश तुम सामने होती और तुम्हें देखता जी भरके...
तुम्हारे जुल्फों को सहलाता और प्यार करता जी भरके...
काश कुछ ऐसा होता कि तुम मेरे पास होती...
और जब भी मैं अकेला होता तू मेरे साथ होती...
काश मेरे हाथों में तेरा हाथ होता...
ज़िन्दगी के सफ़र में दो चार पल का साथ होता...
काश तू भी मुझे इतना याद करती...
बेवक्त हर घड़ी मुझसे बात करती...
काश ऐसा होता कि में रूठ जाता और तू मना लेती...
मेरे हर गम को तू अपने सीने से लगा लेती...
ये जो मेरे जज़्बात थे हक़ीक़त ना सही एक अल्फ़ाज़ बन रहा है...
जैसे महक तेरी खुशबू की मेरे सांसों में समा रहा है...
तुम्हे भी अच्छा लगेगा वो हर एक पल का साथ हमारा...
एक बार एतबार कर के देखना यार, कियुकिं शायद ये आशीष ना मिले दोबारा....
आशीष गुप्ता .....

No comments:
Post a Comment