आज टूटा हूँ इस कदर की ख़ुद को ही भूल गया हूँ...
जिस कलम से तेरा नाम लिखना था आज वो कलम ही भूल गया हूँ...
आशीष गुप्ता...
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...
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