आज टूटा हूँ इस कदर की ख़ुद को ही भूल गया हूँ...
जिस कलम से तेरा नाम लिखना था आज वो कलम ही भूल गया हूँ...
आशीष गुप्ता...
ये ज़माना बदल गया, अपना शहर बदल गया... जिसको जिसको अपना समझा, वो हर इंसान बदल गया... मैं जनता हूं तुम नहीं बदले, ये बदलाव तो दुनिया का दस्तू...
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