तुम्हारी ख़ूबसूरती की बात करूँ तो, मेरे शब्द महक से जाते है...
नाम लिखता हूँ जिस कलम से तुम्हारा, वो कलम भी बहक से जाते हैं...
आँखों की बात करूँ तो... मैं इतना डूब जाता हूँ...
तेरे आशु की दरियाँ में... मैं खुद ही भीग जाता हूँ...
तेरे होंठों की बात करूँ तो... मैं इतना काँप जाता हूँ...
तेरे होंठों को जब छु लू... बर्फ सा पिघल ही जाता हूँ...
तेरे जुल्फों की बात करूँ तो... मैं इतना खो सा जाता हूँ...
बना कर प्यार की तकिया.. गोद में सो ही जाता हूँ...
तेरे पास जब आता हूँ... मै घबरा ही जाता हूं...
आंखें बंद होते ही... मै शरमा सा जाता हूं...
तेरे जिस्म की आगोश में, इस कदर जकड़ ही जाता हूं..
खुद को भूल जाता हूं...और तुझमें खो सा जाता हूं...
आशीष गुप्ता...

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