चलो आज कहीं बहुत दूर का सफ़र करतें हैं...
ज़मी को छोड़ कर आशमा में सफ़र करतें हैं...
ज़मी पे रहकर आपनों को आज़मा कर देख लिया...
चलों कुछ परिंदों को अब अपना बनाकर देखते हैं...
आशीष गुप्ता...
ज़मी को छोड़ कर आशमा में सफ़र करतें हैं...
ज़मी पे रहकर आपनों को आज़मा कर देख लिया...
चलों कुछ परिंदों को अब अपना बनाकर देखते हैं...
आशीष गुप्ता...
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