Sunday, 1 September 2019

आज कहीं दूर का सफ़र करते हैं...

चलो आज कहीं बहुत दूर का सफ़र करतें हैं...
ज़मी को छोड़ कर आशमा में सफ़र करतें हैं...
ज़मी पे रहकर आपनों को आज़मा कर देख लिया...
चलों कुछ परिंदों को अब अपना बनाकर देखते हैं...

आशीष गुप्ता...

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष