दोस्तों की मेंफिल थी
शाम भी रंगीन थी...
वो पल भी क्या पल था
जब सामने तू थी...
आंखों में नशा था
बातों में प्यार...
अब नाराजगी किस बात की
आ गले लग जा मेरे यार...
आशीष गुप्ता...
तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष
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