हां मै स्त्री हूं...
मै ही तुम्हारा कल हूं... मै ही तुम्हारा भविष्य हूं...
मै ही पालनहार हूं...मै ही इस सृष्टि का निर्माण हूं...
मै ही मां हूं... मै ही बहन हूं...
मै ही पत्नी हूं...कियोंकी मै ही स्त्री हूं...
मै ही पेड़ हूं... मै ही छाव हूं...
मै ही पर्वत हूं... मै ही आकाश हूं...
मै कमज़ोर नहीं...मै लाचार नहीं...
मै कोई जीत नहीं...कोई हार नहीं...
मै ही त्याग हूं... मै ही बलिदान हूं...
मै ही शक्ति हूं... कयोंकि मै ही स्त्री हूं...
जो अग्नि से भी जीत जाए...वो ज्वाला हूं मै...
जो मृत्यु से भी लड़ जाए... वो नारी हूं मै...
ना टूटे कोई भी घर...ऐसी दीवार हूं मै...
जो सबको साथ लेकर चले... वो परिवार हूं मै...
जो कभी ना हो पराजित... वो अपराजिता हूं मै...
जो अपनों के लिए हर दर्द को भी सह जाए... वो स्त्री हूं मै....
आशीष गुप्ता....
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