आज प्यासा हूं इतना कि पूरा मैखाना ही पी जाऊं... मगर क्या करूं तलब तेरे होंठों के जाम की है...
आशीष गुप्ता
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
No comments:
Post a Comment