मेरी मोहब्बत पे कीचड़ उछालने वालों...
कभी ख़ुद को आईने में देखा है क्या...
मैं जिस भी गली से गुज़र जाऊं उधर मोहब्बत की बरसात हो जाती है...
तुमने कभी आसमां को भीगते हुए देखा है क्या...
मैने जिसे देखा हर वक़्त... जिसे हमने महसूस किया बेवक्त... आज कल वो मेरे ख्यालों में आने लगी.... कहीं ये इश्क़ तो नहीं... Ashish....
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