Saturday, 10 April 2021

मेरी ज़िन्दगी की डायरी...


ज़िन्दगी की डायरी में अल्फ़ाज़ बहुत थे... मगर फिर भी कुछ कमी सी थी...
सफ़र के इस दौर में हमसफ़र भी ख़ूब थे... मगर फिर भी कुछ कमी सी थी...

अचानक से ज़िन्दगी के पन्नों में कुछ सुगबुगाहट सी हुई...
किसी के आने की खबर लगी... और दिल में दस्तक सी हुई...

तुम्हारे आने से आज मेरी ज़िन्दगी की डायरी पूरी हो गई...
जैसे कोई अधूरी ख्वाहिश आज फिर से पूरी हो गई...

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तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष