Saturday, 23 April 2022

तेरी मोहब्बत में हम शरीफ से बदमाश हो गए...
बेकसूर तो हम भी थे गुनहगार हो गए...


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आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...