Tuesday, 8 October 2024

इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में... कितना उलझ गया हूं मैं...
नौकरी के चक्कर में...अपने शहर से कितना दूर हो गया हूं मैं...
जो पास हैं उन्हें शिकायत है कि... कितना बदल गया हूं मैं..
अब क्या बताएं उन्हें हम... की ख़ुद से भी कितना दूर हो गया हूं मैं...

No comments:

Post a Comment

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....