Friday, 11 April 2025

मेरा लिखने का शौक़ और बढ़ गया...
जब से तुम्हें पढ़ने का शौक़ हो गया...

आशीष...

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आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...