ये ज़माना बदल गया, अपना शहर बदल गया...
जिसको जिसको अपना समझा, वो हर इंसान बदल गया...
मैं जनता हूं तुम नहीं बदले, ये बदलाव तो दुनिया का दस्तूर है...
अब शिकायत भी किसी से क्या करना, लो मैं भी बदल गया...
आशीष
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
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