Monday, 20 July 2026


कभी-कभी सोचता हूँ कि हमारी मुलाक़ात...
यूँ ही नहीं हुई होगी...
शायद किस्मत को हमारी बातें पसंद थीं...
तुमसे बात करके हमेशा ऐसा लगा...
जैसे भीड़ में भी कोई अपना मिल गया हो...
तुम्हारी आदत है या असर, पता नहीं...
मगर तुम्हारा ज़िक्र आते ही चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती है...
ज़िंदगी हर रोज़ नई उलझनें लेकर आती है...
लेकिन कुछ यादें ऐसी होती हैं...
जो हर थकान के बाद भी सुकून दे जाती हैं...
तुम भी उन्हीं यादों में शामिल हो...
अगर कभी मेरी ख़ामोशी ने तुम्हें दूर होने का एहसास कराया हो...
तो बस इतना समझ लेना...
कुछ जज़्बात शब्दों से नहीं...सिर्फ़ एहसासों से समझे जाते हैं....
बस इतना कहना था...
कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते...वो बस दिल में बस जाते हैं...
और तुम, मेरे लिए वैसा ही एक रिश्ता हो...
आशीष....😎

No comments:

Post a Comment

कभी ऑफिस की फ़ाइलें... कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ.... इस भागती हुई ज़िंदगी में...हर दिन बस नई खोज.... सुबह से शाम कब ढल जाती है...पता ही नहीं...